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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट१९८, बालकाण्ड दोहा ३१/१,२, श्रीराम जी का चरित्र
राम चरित चिंतामनि चारू।
संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।
जग मंगल गुनग्राम राम के।
दानि मुकुति धन धरम धाम के।।
भावार्थ:- श्रीरामचन्द्र जी का चरित्र सुन्दर चिंतामणि है और संतों कि सुबुद्धि रूपी स्त्री का सुन्दर श्रंगार है। श्रीरामचन्द्र जी के गुण समूह जगत् का कल्याण करने वाले और मुक्ति, धन, धर्म और परमधाम देने वाले हैं।
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