खोल लो कान👂, वरना मिट्टी में मिल जाएगा खानदान! 🚩
मूंछों पे ताव देना छोड़, तू अपनी औकात देख, 🧐
घर में दुबके नामर्द, बाहर अपनी नस्ल की मात देख! 👊
पंडित की पोथी जल गई, ठाकुर की तलवार जंग खाई, ⚔️📖
लाला-बणिया सब चुप बैठे, जब हक पे आफत आई! 🤐
ओए सवर्णों! अपनी झूठी शान के पिंजरे से बाहर निकलो। तुम जिसे अपनी (शराफत) और (संस्कार) कह रहे हो, जमाना उसे तुम्हारी कायरता मान चुका है। 🐍
🔥 जरा ये कड़वा सच भी चख लो:-
नामर्दी की हद:-अपनी चारदीवारी की फिक्र में इतने अंधे हो गए हो कि बाहर तुम्हारी नस्लों की बलि दी जा रही है। तुम्हारी प्रतिभा का गला घोंटा जा रहा है और तुम गूँगे-बहरे बने तमाशा देख रहे हो। 🙈🙉
खून चूसती 'सिरिंज':- राजनीति की ऐसी 'जहरीली सिरिंज' तैयार है जो तुम्हारी आने वाली पीढ़ियों की रगों से खून का कतरा-कतरा खींच लेगी।
जब तुम्हारी औलादें दाने-दाने को मोहताज होंगी, तब अपनी इन पुरानी कहानियों का अचार डालना! 💉🩸
कानूनी कसाईखाना:- तुम्हारे चारों तरफ ऐसे 'कानूनी औजार' तैयार हैं जो तुम्हें चारों तरफ से हलाल कर देंगे। हर पार्टी तुम्हें 'टिश्यू पेपर' की तरह इस्तेमाल करके कूड़ेदान में फेंक रही है। 🗑️
((सिरिंज लगी है रगों में, तेरा कतरा-कतरा चूसेंगे, 🩸
तू चुप रहा तो ये कसाई, तेरे घर में घुसकर कूटेंगे!)) 🔨
आखिरी ललकार—दम है तो बोल, वरना चूड़ियाँ पहन! ✋🧤
पंडित पोथी में दुबका है, ठाकुर मूंछ में खोया है, और लाला तिजोरी में मस्त है।
पर याद रखना—जब आग लगेगी, तो सब खाक हो जाएगा। 🕯️🔥
हिम्मत है तो दिखाओ अपनी ताकत, एक मुक्का बनकर खड़े हो जाओ, वरना अपनी ये मूंछें मुंडवा लो और घर में घूँघट ओढ़ के बैठ जाओ! 🗣️📢
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