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जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं होता, यह प्रकृति की पूरी दुनिया होती है!
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में लंबे समय तक हुए कोयला खनन के बाद खनन से प्रभावित जमीन को दोबारा हराभरा करने की कोशिशें की जा रही हैं। प्रशासन की ओर से स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाकर खनन क्षेत्र की जमीन के जैविक पुनर्वास का दावा किया गया है। यह निश्चित रूप से पर्यावरण की दिशा में एक जरूरी कदम है।
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जमीन पर दोबारा कितने पेड़ लगाए गए। सवाल यह भी है कि क्या लगाए गए नए पेड़ उस पुराने प्राकृतिक जंगल की पूरी पारिस्थितिकी को वापस ला सकते हैं?
एक प्राकृतिक जंगल को तैयार होने में वर्षों नहीं, बल्कि कई दशकों और कभी-कभी सदियों का समय लगता है। वहां सिर्फ पेड़ नहीं होते, बल्कि मिट्टी की अपनी संरचना, अलग-अलग वनस्पतियां, पक्षी, जंगली जीव, कीड़े-मकौड़े, जलस्रोत और असंख्य जीवों का एक जटिल प्राकृतिक तंत्र होता है।
पुराने जंगलों से स्थानीय समुदायों की आजीविका, परंपराएं और सांस्कृतिक जुड़ाव भी जुड़े होते हैं। इसलिए लाखों नए पौधे लगाना जरूरी और सराहनीय प्रयास हो सकता है, लेकिन इससे मूल प्राकृतिक जंगल की पूरी जैव विविधता तुरंत वापस नहीं आ जाती।

हरियाली वापस आना अच्छी बात है, लेकिन एक बार प्राकृतिक जंगल कट जाए, तो उसे उसी रूप में वापस लाना आसान नहीं होता।

इसलिए खनन के बाद पुनर्वास के साथ-साथ बचे हुए प्राकृतिक जंगलों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
पेड़ लगाना जरूरी है… लेकिन जंगल बचाना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

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भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज

गेंदबाज मोहम्मद शमी की 20 सितंबर को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात हुई। जयंत चौधरी ने खुद सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा की। सके बाद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में मोहम्मद शमी और उनके परिवार की सियासी पारी को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि शमी या रालोद ने अभी तक चुनाव लड़ने अथवा पार्टी में शामिल होने का कोई ऐलान नहीं किया है। ऐसे में सवाल है कि इस मुलाकात का सियासी मतलब क्या है और शमी के परिवार को लेकर चर्चाएं क्यों शुरू हो गई हैं।

1.5 साल से टीम से बाहर हैं मोहम्मद शमी, क्या इसलिए पकड़ा सियासी रास्ता?

मोहम्मद शमी की इस मुलाकात को उनके क्रिकेट करियर के मौजूदा हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। उस मैच में 9 विकेट चटकाकर वे ICC की 'टीम ऑफ द टूर्नामेंट' में शामिल हुए थे। इसके बाद से ही वे टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं।

मई 2026 में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा था कि टी-20 के लिए शमी के नाम पर विचार नहीं हुआ। वहीं घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से रणजी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कुल 67 विकेट चटकाने के बावजूद सितंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्हें जगह नहीं मिली। राष्ट्रीय टीम में लगातार अनदेखी के बीच जयंत से इस मुलाकात को एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। क्रिकेट से दूरी के इस दौर में जयंत चौधरी से मुलाकात ने उनके भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या मोहम्मद शमी पहले भी राजनीति में आने के संकेत दे चुके हैं?

मोहम्मद शमी ने राजनीति में आने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था। अप्रैल 2026 में जब उनसे सियासत में कदम रखने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल उनका ध्यान क्रिकेट पर है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जब उनका मन बनेगा, तब वह इस बारे में बताएंगे।

मोहम्मद शमी के करियर से जुड़ा एक पुराना अनुभव भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2023 में उन्होंने बताया था कि उत्तर प्रदेश की रणजी टीम में चयन के लिए दो बार अंतिम दौर तक पहुंचने के बावजूद उनसे कथित तौर पर कुर्सी हिलाने की मांग की गई थी। इसके बाद उनके भाई हसीब ने फॉर्म फाड़ दिया था और शमी ने बंगाल की ओर से खेलने का फैसला किया।

मोहम्मद शमी नहीं तो बड़े भाई हसीब की सियासी पारी?

जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद अब चर्चा सिर्फ मोहम्मद शमी तक सीमित नहीं है। अमरोहा में उनके बड़े भाई हसीब अहमद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि अगर शमी क्रिकेट की व्यस्तताओं के चलते चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो परिवार के किसी दूसरे सदस्य को सियासी मैदान में उतारा जा सकता है।

हसीब के अमरोहा से चुनाव लड़ने की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि, न तो हसीब ने और न ही रालोद ने उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी दी है। हसीब अहमद ने इस मुलाकात पर अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा, "मैं अभी कानपुर में हूं। मुझे शमी और जयंत चौधरी की रविवार को हुई मुलाकात की जानकारी नहीं है। फिलहाल मैं गाड़ी चला रहा हूं। कुछ देर बाद खाली होकर शमी से इस बारे में बात करूंगा। चुनाव लड़ना है या नहीं, इस पर अभी मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।"

अमरोहा सीट पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें?

अमरोहा विधानसभा सीट को मुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है। यहां करीब सवा तीन लाख मतदाताओं में लगभग दो लाख मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। इनमें तुर्क बिरादरी की संख्या करीब 70 हजार है। मोहम्मद शमी का परिवार इसी समुदाय से आता है।

अमरोहा सीट पर पिछले पांच चुनावों से सपा के महबूब अली विधायक रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में अगर 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और रालोद गठबंधन के तहत यह सीट रालोद के हिस्से में आती है, तो स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

रालोद अमरोहा के साथ नौगावां सादात सीट पर भी दावेदारी जता रही है। अमरोहा से बीजेपी के टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं के लिए भी सीट का गठबंधन में जाना सियासी समीकरण बदल सकता है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात ने चर्चाओं को जरूर हवा दी है, लेकिन चुनाव लड़ने या पार्टी में शामिल होने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

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🎯🥈 निशाना सटीक, हौसला बुलंद… भारत ने जीता सिल्वर! 🇮🇳🔥
जापान के नागोया में जारी Asian Games 2026 में भारतीय निशानेबाजों ने एक बार फिर देश का मान बढ़ाया। 💪🇮🇳
महिलाओं के 10m एयर राइफल टीम इवेंट में इलावेनिल वलारिवन, सोनम म्हास्कर और विनोद विदरसा की तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल 🥈 अपने नाम किया। 👏✨
हर निशाने के साथ बढ़ा भारत का गौरव और हर पल में दिखा देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज़्बा! 🇮🇳❤️
पूरे देश को आप पर गर्व है! 👏🇮🇳

भारत माता की जय! 🇮🇳🔥
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कासगंज के स्कूल में ‘जय श्रीराम’ बोलने पर छात्रों को डांटने का आ@रोप, मचा विवाद!

कासगंज के सोरोंजी स्थित संत तुलसीदास म्युनिसिपल इंटर कॉलेज से एक मामला सामने आया है, जहां सामाजिक विज्ञान के शिक्षक जनार्दन राम पर छात्रों ने ‘जय श्रीराम’ बोलने से रोकने और डांटने का आ@रोप लगाया है।

छात्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 11 बजे कक्षा में भगवान और धर्म से जुड़े विषय पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान कुछ छात्रों ने ‘जय श्रीराम’ कहा, जिसके बाद आ@रोप है कि शिक्षक ने उन्हें डांटते हुए ऐसा बोलने से मना किया। छात्रों का दावा है कि शिक्षक ने कहा, “भक्ति करनी है तो घर पर जाओ।” साथ ही हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं को मानने को लेकर भी सवाल किए गए।

कक्षा 9 के छात्र प्रांशु ने आ@रोप लगाया कि शिक्षक ने भगवान को लेकर अलग-अलग मान्यताओं पर सवाल उठाए और कहा कि भगवान एक ही होना चाहिए। इसके बाद छुट्टी के समय नाराज छात्रों ने पूरे मामले की जानकारी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को दी।

छात्रों ने शिक्षक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और इतिहास को गलत तरीके से पेश करने का भी आ@रोप लगाया है। जनार्दन राम पिछले करीब 5 साल से इसी कॉलेज में सामाजिक विज्ञान पढ़ा रहे हैं।

हालांकि, शिक्षक ने अपने ऊपर लगे सभी आ@रोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह कक्षा में एक कहानी और उदाहरण के जरिए अलग-अलग धर्मों की मान्यताओं को समझा रहे थे। उन्होंने मुस्लिम धर्म में खुदा और ईसाई धर्म में ईसा मसीह का उदाहरण दिया था और बच्चों ने उनकी बात को गलत समझ लिया।

फिलहाल छात्रों के आ@रोप और शिक्षक की सफाई सामने है। ऐसे मामलों में पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

📚🙏 स्कूल में पढ़ाई के दौरान बच्चों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी जरूरी है और अलग-अलग धर्मों को समझाने के लिए संतुलित भाषा का इस्तेमाल भी।
आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? कमेंट में अपनी राय बताइए।

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शायद यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ ने ₹300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया!

‘हनुमान अंश’ की टीम ने फिल्म की शूटिंग के दौरान हर दिन की शुरुआत नीम करौली बाबा की प्रार्थना से की। बताया गया कि सेट पर शूटिंग शुरू करने से पहले पूरी टीम एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ करती थी और फिर अपने काम की शुरुआत करती थी।

फिल्म की टीम के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ी यात्रा भी रही। मेहनत के साथ भगवान हनुमान और नीम करौली बाबा के प्रति श्रद्धा ने इस सफर को और खास बना दिया।

आज जब फिल्म ने ₹300 करोड़ का आंकड़ा पार किया, तो फैंस इस सफलता को टीम की मेहनत और उनकी आस्था से जोड़कर देख रहे हैं।

क्या आपको भी लगता है कि सच्ची श्रद्धा और मेहनत का साथ सफलता को खास बना देता है?
जय बजरंगबली जय नीम करौली बाबा

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3 karod रुपये की संपत्ति, फिर 13 करोड़ की Rolls-Royce! मैथिली ठाकुर पर उठे सवाल, कंगना रनौत ने दिया जवाब
बिहार के अलीनगर से विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर इन दिनों एक लग्जरी Rolls-Royce में नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वायरल तस्वीरों और पोस्ट के बाद कुछ यूजर्स ने उनके चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्ति और इतनी महंगी कार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, कार की कीमत और ownership को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और शुरुआती रिपोर्टों में इसके मालिकाना हक की पुष्टि नहीं होने की बात कही गई थी।
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत मैथिली ठाकुर के समर्थन में सामने आईं। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए ट्रोल करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीति में आने का मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति अपनी निजी जिंदगी और सुविधाएं छोड़ दे। कंगना का कहना था कि जनसेवा करने वाले नेताओं का अपना करियर और जीवन भी होता है और अच्छी जिंदगी जीना अपने आप में गलत नहीं है।
वहीं, सोशल मीडिया पर उठे सवालों का केंद्र अभी भी यही है कि जिस Rolls-Royce में मैथिली ठाकुर नजर आईं, उसका वास्तविक मालिक कौन है और इसे लेकर आधिकारिक तौर पर क्या जानकारी सामने आती है। इस पर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग जानकारी सामने आई है, इसलिए बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
आपके हिसाब से किसी नेता की निजी जिंदगी और उसकी लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर सवाल उठाना कितना सही है?

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2 शादी के बाद भी अकेले रह गए गुलशन ग्रोवर, 400 फिल्मों में किया काम, कभी बेचते थे सामान80 और 90 के दशक में एक से बढ़कर एक खलनायक हुए. उनमें से सबसे ज्यादा चर्चा में रहे गुलशन ग्रोवर. गुलशन ग्रोवर का फिल्मी करियर काफी लंबा और सफल रहा है. हालांकि अपने करियर में उन्होंने बहुत कम ही पॉजिटिव किरदार निभाए हैं.वो निगेटिव किरदार से फैंस के दिलों में गहरी और अमिट छाप छोड़ने में कामयाब हुए. तभी तो उन्हें फिर बाद में 'बॉलीवुड के बैडमैन' भी कहा गया.
गुलशन ग्रोवर ने अपने दौर में एक से बढ़कर एक स्टार्स के साथ काम किया और बड़े पर्दे पर उनसे पंगा लिया. आज भी गुलशन फिल्मी दुनिया में काम कर रहे हैं और फैंस का दिल जीत रहे हैं. हालांकि अभिनेता को अपनी निजी जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. दो शादी करने के बावजूद वो अपनी लाइफ में अकेले रह गए. आइए आज एक्टर के जन्मदिन के मौके पर उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातों के बारे में जानते हैं.
बचपन में रामलीला में करते थे पार्टिसिपेट
गुलशन ग्रोवर आज 71 साल के हो चुके हैं. इस दिग्गज अभिनेता का जन्म 21 सितंबर 1955 को नई दिल्ली में हुआ था. शुरू से ही गुलशन को एक्टिंग का शौक था और उनका अभिनय का सफर बचपन में रामलीला से शुरू हो गया था. जब वो तीसरी और चौथी क्लास में थे तभी उन्होंने रामलीला में एक्टिंग करना शुरू कर दिया था.कॉलेज के दौरान थिएटर ग्रुप से जुड़े
गुलशन ने बड़े होने पर भी एक्टिंग करना जारी रखा और जब वो कॉलेज में थे तब अपने एक्ट से लोगों का दिल जीत लेते थे. गुलशन ने श्रीराम कॉलेज ऑफ काॅमर्स से पढ़ाई की थी और इसी दौरान वो लिटिल थिएटर ग्रुप से जुड़ गए. इसके बाद उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने का फैसला ले लिया था.
डिटर्जेंट पाउडर और फिनाइल की गोलियां बेचते थे गुलशन
गुलश ग्रोवर के 6 भाई-बहन थे और उनके सहित टोटल सात. ऐसे में उनके पैरेंट्स के लिए सभी बच्चों को पढ़ाना मुश्किल था. हालांकि उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बचपन में ही वो काम भी करने लगे थे. दोपहर में वो स्कूल जाते थे और सुबह फ्री टाइम में अभिनेता अमीर लोगों के घर जाकर डिटर्जेंट पाउडर और फिनाइल की गोलियां बेचने का काम करते थे. बदले में उन्हें जो पैसे मिलते थे उससे वो अपनी स्कूल फीस भर दिया करते थे.
2 शादी के बाद भी अकेले रह गए गुलशन ग्रोवर, 400 फिल्मों में किया काम, कभी बेचते थे सामान
2 शादी के बाद भी अकेले रह गए गुलशन ग्रोवर, 400 फिल्मों में किया काम, कभी बेचते थे सामान
2 शादी के बाद भी अकेले रह गए गुलशन ग्रोवर, 400 फिल्मों में किया काम, कभी बेचते थे सामान
80 और 90 के दशक में एक से बढ़कर एक खलनायक हुए. उनमें से सबसे ज्यादा चर्चा में रहे गुलशन ग्रोवर. गुलशन ग्रोवर का फिल्मी करियर काफी लंबा और सफल रहा है. हालांकि अपने करियर में उन्होंने बहुत कम ही पॉजिटिव किरदार निभाए हैं.
वो निगेटिव किरदार से फैंस के दिलों में गहरी और अमिट छाप छोड़ने में कामयाब हुए. तभी तो उन्हें फिर बाद में 'बॉलीवुड के बैडमैन' भी कहा गया.
गुलशन ग्रोवर ने अपने दौर में एक से बढ़कर एक स्टार्स के साथ काम किया और बड़े पर्दे पर उनसे पंगा लिया. आज भी गुलशन फिल्मी दुनिया में काम कर रहे हैं और फैंस का दिल जीत रहे हैं. हालांकि अभिनेता को अपनी निजी जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. दो शादी करने के बावजूद वो अपनी लाइफ में अकेले रह गए. आइए आज एक्टर के जन्मदिन के मौके पर उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातों के बारे में जानते हैं.
बचपन में रामलीला में करते थे पार्टिसिपेट
गुलशन ग्रोवर आज 71 साल के हो चुके हैं. इस दिग्गज अभिनेता का जन्म 21 सितंबर 1955 को नई दिल्ली में हुआ था. शुरू से ही गुलशन को एक्टिंग का शौक था और उनका अभिनय का सफर बचपन में रामलीला से शुरू हो गया था. जब वो तीसरी और चौथी क्लास में थे तभी उन्होंने रामलीला में एक्टिंग करना शुरू कर दिया था.
'महाकाव्य श्री रामायण कथा' में सीता बन ट्रोल हुईं अंजलि अरोड़ा, दिया करारा जवाब
कॉलेज के दौरान थिएटर ग्रुप से जुड़े
गुलशन ने बड़े होने पर भी एक्टिंग करना जारी रखा और जब वो कॉलेज में थे तब अपने एक्ट से लोगों का दिल जीत लेते थे. गुलशन ने श्रीराम कॉलेज ऑफ काॅमर्स से पढ़ाई की थी और इसी दौरान वो लिटिल थिएटर ग्रुप से जुड़ गए. इसके बाद उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने का फैसला ले लिया था.
डिटर्जेंट पाउडर और फिनाइल की गोलियां बेचते थे गुलशन
गुलश ग्रोवर के 6 भाई-बहन थे और उनके सहित टोटल सात. ऐसे में उनके पैरेंट्स के लिए सभी बच्चों को पढ़ाना मुश्किल था. हालांकि उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बचपन में ही वो काम भी करने लगे थे. दोपहर में वो स्कूल जाते थे और सुबह फ्री टाइम में अभिनेता अमीर लोगों के घर जाकर डिटर्जेंट पाउडर और फिनाइल की गोलियां बेचने का काम करते थे. बदले में उन्हें जो पैसे मिलते थे उससे वो अपनी स्कूल फीस भर दिया करते थे.

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जानकारी के अनुसार, फिजिक्स वॉलह के संस्थापक अलख पांडे ने हनुमान अंश गायक सुनील लोधी को अपने संस्थान में आमंत्रित किया। उन्होंने गायक को सम्मानित करते हुए उन्हें 2 लाख रुपये का चेक भेंट किया। इस कदम की सराहना की जा रही है क्योंकि यह कक्षा से परे प्रतिभा को समर्थन देने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

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राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफीमहाराष्ट्र के पुणे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महेश मोटे से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद MNS कार्यकर्ताओं ने महेश मोटे को पकड़ लिया।
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफी
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफी
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफ
Pune: महाराष्ट्र के पुणे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महेश मोटे से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद MNS कार्यकर्ताओं ने महेश मोटे को पकड़ लिय
आरोप है कि उनका चेहरा काला किया गया, सिर पर चप्पल रखकर उठक-बैठक करवाई गई और राज ठाकरे की तस्वीर के सामने माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। घटना के बाद महेश का माफी मांगते हुए वीडियो भी सामने आया है।
रील में क्या कहा था, जिससे नाराज हुए कार्यकर्ता?
रिपोर्टों के मुताबिक, महेश मोटे ने करीब 15 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो या रील पोस्ट की थी। इसमें राज ठाकरे को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर MNS कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इसके बाद महेश कुछ दिनों के लिए केरल चले गए थे।
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफी
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफी
"राज ठाकरे पर ऐसी बात दोबारा मत कहना", चेहरे पर कालिख, सिर पर चप्पल रखवाई; पुणे में इन्फ्लुएंसर से ऐसे मंगवाई माफी
Pune: महाराष्ट्र के पुणे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महेश मोटे से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद MNS कार्यकर्ताओं ने महेश मोटे को पकड़ लिया।
आरोप है कि उनका चेहरा काला किया गया, सिर पर चप्पल रखकर उठक-बैठक करवाई गई और राज ठाकरे की तस्वीर के सामने माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। घटना के बाद महेश का माफी मांगते हुए वीडियो भी सामने आया है।
रील में क्या कहा था, जिससे नाराज हुए कार्यकर्ता?
रिपोर्टों के मुताबिक, महेश मोटे ने करीब 15 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो या रील पोस्ट की थी। इसमें राज ठाकरे को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर MNS कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इसके बाद महेश कुछ दिनों के लिए केरल चले गए थे।
Hyderabad: ऑटो चालक ने मांगे 10 रुपये, यात्री के पास नहीं थे छुट्टे; फिर सड़क पर हुआ खौफनाक खेल
MNS के हडपसर विधानसभा क्षेत्र के उपविभाग अध्यक्ष शुभम जगदाले के अनुसार, कार्यकर्ताओं को जब महेश के पुणे लौटने और कात्रज इलाके में मौजूद होने की जानकारी मिली, तो वे वहां पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक, महेश को कात्रज के एक पार्क से पकड़कर MNS के जनसंपर्क कार्यालय ले जाया गया।
सिर पर चप्पल रखकर उठक-बैठक
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, MNS कार्यालय में महेश के चेहरे पर काला रंग लगाया गया। इसके बाद उन्हें राज ठाकरे की तस्वीर के सामने झुककर माफी मांगने और सिर पर चप्पल रखकर उठक-बैठक करने के लिए कहा गया। घटना से जुड़े वीडियो में महेश भावुक नजर आते हैं और हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखाई देते हैं। उन्होंने राज ठाकरे और MNS कार्यकर्ताओं से माफी मांगी और कहा कि उनसे गलती हुई है। उन्होंने यह भी अपील की कि उन्हें आगे परेशान न किया जाए।

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जब पिता की जिंदगी बचाने की बारी आई, तो बेटी ने बिना पीछे हटे बढ़ाया अपना हाथ

कभी-कभी जिंदगी इंसान के सामने ऐसी परीक्षा रख देती है, जहां शब्द कम पड़ जाते हैं और रिश्तों की असली गहराई सामने आती है। ऐसी ही एक भावुक कहानी उस पिता और बेटी की है, जहां पिता की जिंदगी बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी।

परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। पिता की हालत को देखते हुए लिवर डोनेट करने वाले की जरूरत थी। बताया जा रहा है कि जब बेटे से लिवर दान करने की बात आई, तो उसने पीछे हटने का फैसला किया। ऐसे वक्त में परिवार की दो बेटियों में से एक बेटी आगे आई और उसने अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए लिवर का एक हिस्सा दान करने की इच्छा जताई।

एक बेटी के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। लेकिन पिता को मुश्किल में देखकर उसने अपने डर और चिंता से ऊपर अपने रिश्ते को रखा। उसका कहना था कि जब पिता को उसकी जरूरत है, तो वह उनके साथ खड़ी रहेगी।

लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का एक हिस्सा मरीज को प्रत्यारोपित किया जाता है। लिवर की खास क्षमता होती है कि दान के बाद डोनर के शरीर में बचा हुआ लिवर समय के साथ बढ़ता है और अपनी कार्यक्षमता को काफी हद तक वापस हासिल कर लेता है। हालांकि, यह एक गंभीर चिकित्सकीय प्रक्रिया है और डोनर को पूरी मेडिकल जांच के बाद ही इसके लिए योग्य माना जाता है।

इस बेटी का फैसला सिर्फ अंगदान की बात नहीं है। यह उस रिश्ते की गहराई को दिखाता है, जिसमें बेटी ने अपने पिता की जिंदगी को बचाने के लिए आगे आने का साहस दिखाया। माता-पिता अक्सर अपनी संतान के लिए पूरी जिंदगी त्याग करते हैं और जब कभी वही माता-पिता मुश्किल में होते हैं, तब संतान का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

इस कहानी की सबसे खूबसूरत बात यही है कि बेटी ने यह नहीं देखा कि मुश्किल कितनी बड़ी है, उसने सिर्फ यह देखा कि सामने उसके पिता हैं और उन्हें उसकी जरूरत है।

बेटा हो या बेटी, माता-पिता के लिए संतान का प्यार ही सबसे बड़ा सहारा होता है। ऐसी घटनाएं समाज को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि संतान की कीमत उसके लिंग से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, संवेदनशीलता और मुश्किल वक्त में निभाए गए रिश्तों से होती है।

🙏 जिस बेटी ने अपने पिता के लिए इतना बड़ा फैसला लिया, उसके साहस को सलाम।

बेटियां सिर्फ घर की रौनक नहीं होतीं, जरूरत पड़ने पर वही घर की सबसे मजबूत दीवार बनकर भी खड़ी हो सकती हैं। ❤️🙏

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