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एक ही राजवँश के 2 राजपूत महा यौद्धा...
जिन्होंने मुगलों को चने चबा दिए थे.. दोनों ही सिसोदा ग्राम के राणा लक्ष्मण सिंह के वंशज..
महाराणा प्रताप व छत्रपति शिवा जी महाराज..
महाराणा प्रताप ने मेवाड़ पर शासन किया इसलिए इन्हें मेवाड़ी राणा कहते हैं...
एवं छत्रपति शिवाजी के पूर्वज दक्षिण में चले गए इसलिए उस क्षेत्र के कारण इनको भी मराठा कहा जाता है...
भोसले व घोरपड़े दोनो राजवँश आज भी स्वयं को मेवाड़ के राजपूत मानते हैं..
छत्रपति शिवाजी महाराज का राजतिलक पहले ब्राह्मणों ने करना मना कर दिया था क्योंकि उस समय मेवाड़ से वे नाराज होकर दक्षिण गए थे तो वे ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में कुछ नही ले गए एवं साधारण जीवन व्यतीत किया...
उसके पश्चात काशी के विद्वान गंगाभट्ट ने उदयपुर से वंशावली मंगवाकर उन्हें सिसोदिया राजपूत प्रमाणित किया तथा राज्याभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण हुई
ये उल्लेखित है इतिहास में
- रावल प्रताप सिंह (साहित्य शोधकर्ता)

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