लालच एसा भाव है जिससे कोई बचना भी चाहे तो नहीं बच सकता। चाहे ये लालच आपसे अनैतिक कार्य से खुद कि पूर्ति करवाएं या नैतिक तरीके से। परंतु ये कलयुग है नैतिकता तो गिने-चुने लोगों में ही मिलेगी। अनैतिकता ने तो पैर पसार लिये हैं। फिर चाहे किसी की जान जाए कुछ भी हो लालच पूर्ति उद्देश्य