34 साल, एक भी छुट्टी नहीं: समीरन डेका बने मेहनत और अनुशासन की मिसाल
आज के दौर में जहां लोग छुट्टियों और आराम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं गुवाहाटी के समीरन डेका ने अपनी पूरी ज़िंदगी काम को समर्पित कर दी। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में 34 साल 7 महीने और 4 दिन की सेवा के दौरान उन्होंने न तो कभी मेडिकल लीव ली और न ही अर्जित छुट्टी।
1991 में एक साधारण सहायक रसोइए के रूप में शुरू हुआ उनका सफर, आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। मेहनत, समय की कद्र और ईमानदारी—यही उनकी सफलता का मंत्र रहा। इन्हीं मूल्यों ने उन्हें ग्रुप-बी कमर्शियल ऑफिसर तक पहुंचाया।
समीरन डेका मानते हैं कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती। यह रोज़ किए गए छोटे प्रयासों का नतीजा होती है। उन्होंने कहा, “अगर आप अपने लक्ष्य से जुड़े रहते हैं, तो मंज़िल खुद आपके पास आती है।”
उनकी कहानी यह साबित करती है कि असली हीरो वही होते हैं, जो बिना शोर किए अपने काम से इतिहास बना देते हैं।
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