लेकिन आरफा खानम, नेहा सिंह राठौर, सुप्रिया श्रीनेत और प्रियंका चतुर्वेदी जैसी कई चर्चित महिलाएं इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
सोचिए, अगर बीजेपी शासित किसी राज्य में ऐसा मामला सामने आता, तो यही लोग कितना बड़ा हंगामा खड़ा करते।
फिर सवाल उठता है कि महिलाओं के शोषण पर आवाज उठाने का मापदंड क्या अब यह हो गया है कि घटना किस राज्य में हुई और वहां किस पार्टी की सरकार है? यही दोहरा रवैया सबसे ज्यादा चिंताजनक है।