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आप सभी ने सदियों से चली आ रही इस राजपूती रीत के बारे में सुना ही होगा, इसी मर्यादा और वचनबद्धता को अयोध्या के सरायरासी गाँव के सूर्यवंशी राजपूतों ने जीकर दिखाया है।
राम मंदिर टूटने का दुःख पूरे देश को था, लेकिन वह दर्द सबसे गहरा सरायरासी गाँव के राजपूतों के सीने में था। जब 1528 ई. के आसपास बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा, तो वहां के राजपूतों ने एक भीषण प्रतिज्ञा ली थी।
"जब तक राम मंदिर दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, हम अपने सिर पर पगड़ी नहीं पहनेंगे और पैरों में जूते नहीं डालेंगे।"
यह कोई छोटी प्रतिज्ञा नहीं थी। यह तपस्या लगातार 500 सालों तक चली। पीढ़ी दर पीढ़ी, नंगे पाँव और बिना पगड़ी के रहकर उन्होंने अपने पूर्वजों के वचन को निभाया।
और फिर वह ऐतिहासिक दिन आया 22 जनवरी 2024 जब अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ और प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब जाकर इन राजपूतों ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की और 500 साल बाद गर्व से अपने सिर पर पगड़ियाँ बांधीं। 🙏
यह है राजपूती आन, बान और शान! नमन है ऐसे वीरों और उनके त्याग को।
जय श्री राम! जय राजपूताना! 🚩🙏

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