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वकील एपी सिंह का बयान "हाथ बराबर, पैर बराबर, पढ़ाई बराबर, कोचिंग बराबर... फिर आरक्षण किस बात का" सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नौकरियां टैलेंट के आधार पर मिलनी चाहिए, न कि जाति पर। यह बयान आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाता है, जो भारत में लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
बयान की पृष्ठभूमि
एपी सिंह, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं, ने एक इवेंट या इंटरव्यू में यह बात कही। उनका तर्क है कि आज के दौर में सभी के पास समान अवसर हैं – कोचिंग, इंटरनेट, शिक्षा। अगर सबकी तैयारी बराबर है, तो आरक्षण क्यों? उन्होंने क्रीमी लेयर को आरक्षण न देने की वकालत की, चाहे वह किसी भी जाति का हो। यह बयान तेलंगाना PSC आरक्षण विवाद के बाद आया, जहां प्रीलिम्स में मेरिट बेस्ड सिलेक्शन पर बहस छिड़ी।
सही दिशा में कदम?
एपी सिंह का विचार आंशिक रूप से सही है। संविधान में आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, लेकिन 75 साल बाद भी पीढ़ी दर पीढ़ी चलना उचित नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी केस में 50% कैप लगाया, और क्रीमी लेयर OBC के लिए लागू है। SC/ST में भी लागू करने की मांग हो रही है। आज EWS आरक्षण से सामान्य वर्ग को भी कोटा मिला। टैलेंट बेस्ड सिलेक्शन से प्रशासन मजबूत होगा, जैसे UPSC में प्रीलिम्स मेरिट पर होता है।

विरोध और पक्ष
पक्ष: भ्रष्टाचार रुकेगा, योग्य लोग आएंगे। गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में सफल मॉडल हैं।
विपक्ष: गांवों में अभी भी असमानता है। आरक्षण हटाने से दलित-आदिवासी पिछड़ जाएंगे। प्रदर्शन हुए, BJP ने इसका विरोध किया।
एपी सिंह का बयान मेहनती युवाओं की फ्रस्ट्रेशन को आवाज देता है। लेकिन पूर्ण समानता के बिना इसे लागू करना कठिन। सरकार को आर्थिक आधार पर आरक्षण बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष
आरक्षण का मूल उद्देश्य सशक्तिकरण था, न कि स्थायी कोटा। एपी सिंह सही कहते हैं – टैलेंट राज करे। लेकिन बदलाव धीरे-धीरे हो, ताकि कोई वंचित न रहे। यह बहस देश को आगे ले जाएगी।

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