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विरार के एक मिडिल क्लास परिवार से निकले इस युवा खिलाड़ी ने रोज़ 80 किलोमीटर लोकल ट्रेन में सफर कर वानखेड़े स्टेडियम में प्रैक्टिस की। पिता योगेश बैंक की नौकरी के साथ घंटों सफर कर बेटे का साथ देते रहे, फिर उसके सपने के लिए नौकरी तक छोड़ दी।
सिर्फ 18 साल की उम्र में आयुष ने न सिर्फ बड़े रन बनाए, बल्कि अपनी निडर बल्लेबाज़ी, शांत दिमाग और रणनीतिक सोच से भारत की अंडर-19 टीम की कप्तानी संभाली - वही कप्तानी जो कभी विराट कोहली और पृथ्वी शॉ जैसे दिग्गजों ने निभाई थी।
ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में आयुष ने सिर्फ टीम को लीड नहीं किया, बल्कि कमांड किया। सेमीफाइनल और फाइनल में उनकी अर्धशतकीय पारियां भारत के रिकॉर्ड छठे खिताब की नींव बनीं।
यह कहानी ट्रॉफी की नहीं, त्याग, अनुशासन और अटूट विश्वास की है।
और सच मानिए - यह तो बस शुरुआत है।
BCCI Domestic Indian Cricket Team
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