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तमिलनाडु के थडिकोम्बू गांव के सौंदरराजा पेरुमल मंदिर से 1952 में चोरी हुई संत तिरुमंगई अलवार की 16वीं शताब्दी की मूर्ति 70 साल बाद भारत लौट आई है। इस मूर्ति की चोरी के बाद मंदिर में नकली मूर्ति रखी गई थी और असली मूर्ति विदेशी संग्रहालय में चली गई थी। ऑक्सफोर्ड के एशमोलियन म्यूजियम ने 1967 में इसे डॉक्टर जे. आर. बेलमोंट से खरीदा, बिना यह जाने कि यह चोरी की है।

मूर्ति की पहचान 'इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट' और एस. विजय कुमार के प्रयासों से पुरानी तस्वीरों और रिसर्च के जरिए हुई। लगभग 8 साल की कानूनी लड़ाई और शोध के बाद यह मूर्ति मंगलवार को लंदन में इंडियन हाई कमिशन में भारत को सौंप दी गई। यह केवल कलाकृति की वापसी नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था की बड़ी जीत मानी जा रही है। अभी भी सात अन्य मूर्तियों की वापसी बाकी है।

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