मराठा साम्राज्य के कुशल कूटनीतिज्ञ, कुशल प्रशासक ब्रिटिश शासन के कठिन दौर में मराठा साम्राज्य की कीर्ति को उसकी बुलन्दियों पर पहुंचाने वाले दूरदर्शी मंत्री नाना फडणवीस (12 फरवरी 1742 – 13 मार्च 180 जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शतशः नमन!
उनके राजनीतिक चातुर्य के कारण अंग्रेज उन्हें “मराठा मैकियावेली” कहते थे। उनका वास्तविक नाम बालाजी जनार्दन भानु था। उनका जन्म सतारा, महाराष्ट्र में एक चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद, जब मराठा शक्ति बिखर गई थी, तब नाना फड़नवीस ने साम्राज्य को पुनर्गठित करने और उसकी प्रतिष्ठा वापस दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।
पेशवा नारायण राव की हत्या के बाद, उन्होंने 'बार भाई' (12 सदस्यों की परिषद) का गठन किया, जिसने नवजात पेशवा माधवराव द्वितीय के नाम पर शासन चलाया और रघुनाथराव के सत्ता हथियाने के प्रयासों को विफल कर दिया।उन्होंने मराठा हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजों (ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी) की विस्तारवादी नीतियों का कड़ा विरोध किया और पहले आंग्ल-मराठा युद्ध में कुशल कूटनीति का परिचय दिया।उन्होंने मैसूर के टीपू सुल्तान और हैदराबाद के निजाम के खिलाफ सफल सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया और मराठा क्षेत्रों को पुनः प्राप्त किया।नाना ने एक मजबूत खुफिया विभाग और केंद्रीकृत राजस्व प्रणाली की स्थापना की थी।
नाना फड़नवीस की मृत्यु (13 मार्च 180 को मराठा साम्राज्य के पतन की शुरुआत माना जाता है, क्योंकि उनके बाद कोई भी ऐसा नेता नहीं बचा जो बिखरे हुए मराठा सरदारों को एकजुट रख सके।
उनकी नीति, बुद्धिमत्ता और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देती रहेगी।
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