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“माँ को बचाने के लिए बेटे ने दे दिया अपना लीवर, लेकिन किस्मत ने छीन ली उसकी जिंदगी”

पाकिस्तान के शहर सरगोधा के रहने वाले एक छात्र उमर फारूक बाजवा ने अपनी माँ की जान बचाने के लिए अपने लीवर का एक हिस्सा दान कर दिया। उनकी माँ गंभीर लीवर बीमारी से जूझ रही थीं और डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी जान बचाने का एकमात्र तरीका लीवर ट्रांसप्लांट है। ऐसे में बेटे उमर फारूक ने बिना देर किए अपनी माँ को अपना लीवर देने का फैसला किया। ऑपरेशन लाहौर के शेख जायद अस्पताल में किया गया। सर्जरी के बाद कुछ समय तक सब ठीक लग रहा था, लेकिन बाद में उमर की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन के बाद उनके शरीर में संक्रमण और जटिलताएँ पैदा हो गईं और लगभग एक हफ्ते तक जिंदगी से जूझने के बाद उनकी मौत हो गई। बताया गया कि बाद में जांच में पता चला कि उमर को हेपेटाइटिस-E का संक्रमण था, जो पहले टेस्ट में सामने नहीं आया था।

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