8 hrs - Translate

भारत में इच्छा मृत्यु कैसे होती है
1️⃣ मरीज की स्थिति
मरीज को लाइलाज या अंतिम अवस्था की बीमारी होती है।
बहुत अधिक दर्द या ऐसी स्थिति जिसमें ठीक होने की संभावना नहीं होती।
2️⃣ मरीज की इच्छा (Living Will)
मरीज पहले से लिखकर दे सकता है कि अगर वह ऐसी हालत में पहुँचे तो उसे कृत्रिम मशीनों पर ज़िंदा न रखा जाए।
इसे लिविंग विल कहते हैं।
3️⃣ परिवार की सहमति
अगर मरीज बोलने की स्थिति में नहीं है, तो परिवार के सदस्य डॉक्टरों को उसकी इच्छा बताते हैं।
4️⃣ डॉक्टरों की मेडिकल बोर्ड जांच
अस्पताल में दो अलग-अलग डॉक्टरों का बोर्ड मरीज की स्थिति की जांच करता है।
वे लिखित में बताते हैं कि बीमारी लाइलाज और अंतिम अवस्था में है।
5️⃣ कानूनी पुष्टि
कई मामलों में यह प्रक्रिया मजिस्ट्रेट या प्रशासनिक अधिकारी के सामने पुष्टि की जाती है ताकि कोई गलत निर्णय न हो।
6️⃣ जीवन बचाने वाली मशीनें हटाना
अगर सभी मंजूरी मिल जाती है, तो डॉक्टर कृत्रिम जीवन-सहायक उपचार (जैसे वेंटिलेटर आदि) जारी न रखने का निर्णय ले सकते हैं।
#breakingnews
#harishrana

image