लीला का प्रसंग:
ऋषि व्याघ्रपाद के पुत्र उपमन्यु छोटे बालक थे। एक बार उन्होंने अपनी माता से दूध माँगा, पर गरीबी के कारण माता के पास दूध नहीं था। माता ने आटा घोलकर पिला दिया, पर बालक समझ गया कि यह दूध नहीं है। माता ने दुखी होकर कहा— "बेटा! अगर दूध चाहिए तो जगत के पिता महादेव की शरण में जा, वही सब देने वाले हैं।"
छोटा सा बालक हिमालय पर जाकर घोर तपस्या करने लगा। भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए 'इंद्र' का रूप धरा और प्रकट होकर शिव जी की निंदा करने लगे। उन्होंने कहा— "उस भस्मधारी (शिव) की पूजा छोड़ दे, मैं तुझे स्वर्ग का ऐश्वर्य दूँगा।"