काम लोहे का, हाथ में थमा दी बंदूक... रामपुर के शावेज की रूस में मौत, परिवार का आरोप: जबरन युद्ध में झोंक दिया

रामपुर के एक साधारण परिवार का बेटा शावेज बेहतर रोजगार की तलाश में रूस गया था, लेकिन किस्मत उसे ऐसी जगह ले गई जहां से वह जिंदा वापस नहीं लौट सका. करीब 9 महीने पहले 22 वर्षीय शावेज अपने परिवार का सहारा बनने के इरादे से रूस गया था. वह वहां स्टील फर्नीचर का काम करने लगा था. घरवालों को उम्मीद थी कि शावेज विदेश में काम करके उनकी आर्थिक स्थिति सुधार देगा, लेकिन रूस पहुंचने के महज 2 महीने बाद ही हालात बदल गए. आरोप है कि उसे जबरन रूस की सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया.

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