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जब रिटायरमेंट के बाद भी सेवा नहीं रुकी!

88 वर्ष की उम्र में, जब ज़्यादातर लोग आराम की रफ्तार पकड़ लेते हैं, तब इंदरजीत सिंह सिद्धू हाथ में झाड़ू लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं।

हर सुबह ठीक 6 बजे, पूर्व आईपीएस अधिकारी और कभी डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रहे सिद्धू चंडीगढ़ की सड़कों पर खुद कचरा उठाते हैं। यह न तो उनकी नौकरी है, न ही किसी ने उनसे कहा—बस उन्हें अपने शहर की गरिमा टूटती देखी नहीं गई।

रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पहले प्रशासन से शिकायत की। जब कोई बदलाव नहीं हुआ, तो उन्होंने शिकायत की जगह खुद पहल की। एक थैले के साथ अकेले सफाई शुरू की। लोग हँसे, किसी ने उन्हें “पागल” कहा, लेकिन वे रुके नहीं।

धीरे-धीरे उनकी यह ख़ामोश कोशिश एक आंदोलन बन गई। पड़ोसी जुड़े, परिवार आगे आया। एक व्यक्ति की जिम्मेदारी सामूहिक चेतना में बदल गई। “सिटी ब्यूटीफुल” चंडीगढ़ को उसका सबसे सच्चा और निस्वार्थ प्रहरी मिल गया।

सिद्धू सादगी से कहते हैं:
“सफाई में कोई शर्म नहीं, स्वच्छता ही ईश्वर की सेवा है”

इसी भावना और आजीवन जनसेवा के लिए इस गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (Unsung Heroes श्रेणी) से सम्मानित किया।

यह कहानी याद दिलाती है कि पद रिटायर हो सकते हैं, वर्दी उतर सकती है लेकिन उद्देश्य कभी नहीं।
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