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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास यानी पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु और भगवान शिव की विशेष आराधना का महीना माना जाता है। इस पावन महीने में गोंडा के प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव पर जल चढ़ाने, रुद्राभिषेक करने और विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं।

पृथ्वीनाथ मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। मलमास के दौरान भक्त सुबह से ही जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से भक्तिमय बना हुआ है।

मंदिर के पुजारी पंडित हनुमंत शरण तिवारी के अनुसार मलमास में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस महीने शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते और श्रद्धालु पूजा-पाठ व भक्ति में समय बिताते हैं। मान्यता है कि मलमास में रुद्राभिषेक कराने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप के वरदान को समाप्त करने के लिए एक अतिरिक्त मास की रचना की थी, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यही कारण है कि इस महीने को भगवान विष्णु और भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
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