4 hrs - Translate

गुजरात के चराड़ा गांव में 13 अगस्त 1929 को जन्मे संत प्रह्लाद जानी का दावा था कि उन्होंने 76 सालों तक न कुछ खाया और न ही पानी पिया। 'चुनरीवाले माताजी' के नाम से मशहूर संत के अनुसार, बचपन में देवी महामाया के वरदान के कारण उनके तालु से निकलने वाले दिव्य रस से उन्हें बिना खाए-पीए ऊर्जा मिलती थी।
उनके इस दावे की सच्चाई जानने के लिए वर्ष 2010 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक टीम ने उन पर अध्ययन किया था। उन्हें 15 दिनों तक 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी वाले एक विशेष कमरे में रखा गया। परीक्षण के दौरान उन्होंने न तो कुछ खाया और न ही पानी पिया, फिर भी उनका स्वास्थ्य बिल्कुल सामान्य मिला। इस परिणाम ने वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित कर दिया था। DRDO का मकसद यह जानना था कि क्या मानव शरीर कम संसाधनों में लंबे समय तक जीवित रह सकता है, ताकि कठिन परिस्थितियों में इसका उपयोग सैनिकों के लिए किया जा सके।
26 मई 2020 को 90 वर्ष की आयु में गुजरात में संत प्रह्लाद जानी का निधन हो गया।

image