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जब तक चुप थे तो 'खान सर' कहलाते थे, लेकिन जैसे ही छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने लगे, एफआईआर दर्ज हुई और गिद्ध पूरा नाम ढूंढने निकल पड़े..।
यह बेहद शर्मनाक और घिनौना चेहरा है हमारे समाज के कुछ कुंठित लोगों का और TRP के भूखे भेड़िये मीडिया चैनलों का। 🙏✌️💪
जब तक पटना के खान सर लाखों गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे थे, देश-विदेश में बिहार का नाम रोशन कर रहे थे, तब तक हर कोई उन्हें सिर्फ 'खान सर' कहकर अपनी दुकानें चमका रहा था।
किसी को उनके असली नाम से कोई मतलब नहीं था।
लेकिन जैसे ही छात्रों के हक की आवाज उठाने लगे और उनके खिलाफ एक एफआईआर क्या दर्ज हुई, इन तथाकथित 'छपरियों' और नफरती तत्वों ने उन्हें "फैजल खान" लिखना और ट्रेंड कराना शुरू कर दिया।
मकसद साफ है—एक शिक्षक की पहचान को भी सांप्रदायिक रंग देना और उनका चरित्र हनन (Character Assassination) करना।
बहरहाल, जो लोग उन्हें 'फरार' बताकर तालियां पीट रहे हैं, उन्हें जान लेना चाहिए कि खान सर ने खुद कहा है कि उन्हें एफआईआर की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
और हाँ, अगर कानूनी लड़ाई की बात है, तो वकीलों की फौज भी तैयार है।
सच को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। पूरा छात्र समुदाय और देश का हर समझदार नागरिक आज खान सर के साथ खड़ा है।
इस नफरती एजेंडे को बंद करो और Faisal Khan Sir से माफ़ी माँगो! 😒

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