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चाय की चुस्कियाँ इतनी भारी पड़ेंगी, ये शायद उन ऑन-ड्यूटी नर्सों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा जब बगल के कमरे में एक मासूम बच्ची डॉक्टर की हवस का शिकार बन रही थी। कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल का यह वाकया हमारी पूरी सरकारी व्यवस्था और संवेदनशीलता की पोल खोलकर रख देता है। मामला तब और ज्यादा अजीब हो गया जब इस भयंकर लापरवाही पर शर्मिंदा होने के बजाय नर्सिंग स्टाफ ने अपनी 'ईगो' पर बात ले ली और हड़ताल पर बैठ गईं। सरकारी नौकरी का ऐसा रौब और अपनी ही गलती पर ये सीनाजोरी वाकई हैरान करने वाली है। इसी बात पर भड़कते हुए महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने साफ-साफ कह दिया कि जब डॉक्टर उस बच्ची का शारीरिक शोषण कर रहा था, तब तीन-तीन नर्सें अंदर बैठकर मजे से चाय पी रही थीं—यह भला कैसे मंजूर किया जा सकता है? एक तो सरकारी नौकरी का ऐसा फायदा उठाना और ऊपर से गलती पकड़े जाने पर काम बंद करके धमकी देना, यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि न तो नर्सों का यह रवैया सही है और न ही वे इस मामले में किसी भी कीमत पर माफी मांगने वाली हैं। सच तो यह है कि जब रक्षक ही अपनी जिम्मेदारी भूलकर चाय के कपों में खोए रहेंगे और पकड़े जाने पर हड़ताल का ड्रामा करेंगे, तो आम जनता को न्याय मिलना तो दूर, अस्पतालों में पैर रखते हुए भी डर लगेगा।
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