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एक समय था जब रिंकू सिंह राजपूत (वीर महान) का नाम दुनिया भर में गूंज रहा था। छोटे से गाँव भदोही (यूपी) से निकले, एक ट्रक ड्राइवर के बेटे ने नियति को टक्कर दे दी थी। नौ भाई-बहनों वाले आम से घर से निकले इस जज़्बाती लड़के ने मिलियन डॉलर आर्म रियलिटी शो जीता, अमेरिका गए, प्रोफेशनल बेसबॉल खेला — वो भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी थे।
फिर WWE में "वीर महान" बनकर लड़के नेधमाल मचा दिया। 6 फीट 4 इंच का विशालकाय शरीर, ताकत, शोहरत, पैसा — सब कुछ कदमों में था। जॉन सीना जैसे दिग्गजों के सामने रिंग में खड़े हुए, करियर खुला हुआ था, स्वर्णिम युग शुरू हो चुका था।
मगर... पिता के निधन के बाद सब बदल गया। दौलत पा लेने पर भी दुःख गया नहीं। तो फिर क्या फायदा इस सुख और दौलत का। मन बैचैन था।
दुनिया की चकाचौंध छोड़कर रिंकू वृंदावन पहुँच गए प्रेमानंद जी महाराज की शरण में। आत्मा की शांति का अनुभव हुआ। पहलवान का मन ब्रजधाम में रम गया। गेरुए वस्त्र धारण कर सन्यास ले लिया। अब नाम, शोहरत, संपत्ति सब कुछ त्याग दिया।
आजकल आश्रम में झाड़ू लगाते हैं, मधुकरी (भिक्षा) मांगते हैं, भगवद भक्ति में लीन रहते हैं। पहले 24 रोटी खाते थे, अब दिन में सिर्फ 2 रोटी, वो भी भिक्षा मांग कर।
जब आध्यात्म समझ आ जाता है, तो सोना भी मिट्टी लगने लगता है। जो इस मार्ग पर चल पड़े, उनके लिए ना धन का मोह है, ना यश का लालच। बस गुरु की कृपा और भगवान का नाम ही पूंजी है।
हर हर महादेव दोस्तों।🙏🔥

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