रोज़गार की मजबूरी या मौत को दावत?
मेटल पॉलिशिंग फैक्ट्रियों में बिना किसी मास्क और सेफ्टी गियर के काम करते ये मज़दूर हर सांस के साथ अपनी ज़िंदगी कम कर रहे हैं!
ये काली धूल मेटल पाउडर उनके फेफड़ों को धीरे-धीरे खत्म कर रही है!
लेबर सेफ्टी कानून सिर्फ कागज़ों तक ही क्यों सिमटकर रह जाते हैं?