महाभारत के अंत के बाद…
जब श्री कृष्ण इस धरती से चले गए,
तब सब कुछ बदल गया।
अर्जुन, जो कभी कुरुक्षेत्र में अजेय था,
जिसके गांडीव के सामने महारथी भी टिक नहीं पाए…
वही अर्जुन द्वारिका की यदुवंशी स्त्रियों और बच्चों को
सुरक्षित हस्तिनापुर ले जा रहा था।
लेकिन रास्ते में…
कुछ साधारण लुटेरों ने हमला कर दिया।
अर्जुन ने गांडीव उठाया…
पर इस बार वह पहले जैसा नहीं था।
दिव्य अस्त्र शांत हो चुके थे,
तरकश के बाण भी जैसे साथ छोड़ चुके थे।
और वो महान धनुर्धर…
एक साधारण काबा के सामने हार गया।
क्योंकि इस बार न समय साथ था…
न श्री कृष्ण।
बाद में महर्षि वेद व्यास ने समझाया—
यह सब नियति थी, समय का खेल था…
ताकि अर्जुन समझ सके कि
शक्ति, ज्ञान और विजय भी
समय के आगे कुछ नहीं।
समय सबसे बलवान है।
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