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इन दिनों लोगों के बीच नाम जप के लिए काउंटर का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ गया है। किंग कोहली के हाथों में काउंटर नजर आने के बाद से ही लोगों के बीच इसका चलन तेजी से बढ़ने लगा। आजकल कई लोग इसे अपनी उंगलियों पर बांधे नजर आते हैं।
पहले जहां लोग माला के जरिए भगवान का नाम लेते थे, वहीं अब धीरे-धीरे काउंटर ने इसकी जगह ले ली है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या काउंटर के इस्तेमाल करने से माला फेरने जितना ही फल मिलता है? इन सवाल का जवाब खुद प्रेमानंद महाराज जी ने दिया है। आइए जानते हैं इस बारे में महाराज जी की राय-
दरअसल, इस बारे में प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे एक व्यक्ति ने सवाल किया कि क्या नाम जप लिए काउंटर का इस्तेमाल करने से फल मिलता है? इस पर महाराज जी कहते हैं कि काउंटर का इस्तेमाल करने का मतलब यह थोड़ी है कि हम काउंटर थोड़े गिन रहा है। असल में जप तो हमारी जुबान और मन ही कर रहा है। काउंटर तो बस उस जप की गिनती करने में मदद कर रहा है। इसलिए काउंटर का इस्तेमाल करना गलत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इसके इस्तेमाल से तो मन को शांति और खुशी मिलती है कि हम 50 हजार या 60 हजार बार जप किया। साथ ही काउंटर के इस्तेमाल से नाम जप करने की आदत को और ज्यादा प्रोत्साहन मिलता है।
क्या तुलसी माला की जगह लेगा काउंटर?
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि आज की बदलती दुनिया में माला टांग के ऑफिस जाना आसान नहीं है। माला का एक नियम है कि 108 जप के बाद ही यह पूरी मानी जाती है। ऐसे में अगर आप माला से जप करते हैं और बीच में कोई काम या बात करने आ जाए, तो माला अधूरी रह जाती है।
इसके विपरीत काउंटर में आप जहां से जप छोड़ते हैं, वहीं से इसे फिर से शुरू कर सकते हैं और इसे आपको शांति और खुशी मिलती है। इसलिए खूब नाम जप करो क्योंकि काउंटर नहीं बोल रहा है, बोल तुम बोल रहे हो, इसलिए तुम्हारा कल्याण होगा।
काउंटर के इस्तेमाल का मतलब यह नहीं कि माला फेरना छोड़ देना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि अगर आप घर या किसी ऐसी जगह हैंं, जहां माला फेरना आसान है, तो यहां माला से जप करें। लेकिन अगर आप ऑफिस या यात्रा पर है, तो काउंटर की मदद से भी नाम जप कर सकते हैं।

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