वक्त बदल रहा है और रिश्तों की परिभाषाएँ भी बदल रही हैं। अब सिर्फ बेटियों की सुरक्षा ही नहीं, बेटों की सुरक्षा और मानसिक शांति भी एक बड़ा सवाल बनती जा रही है।
बहुत मुश्किल है अब बेटों को सुरक्षित रख पाना, खतरे से खाली नहीं है बहुओं को घर लाना!
रिश्ते भरोसे, सम्मान और समझदारी से चलते हैं, डर और दिखावे से नहीं