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समस्त देश व प्रदेशवासियों को भगवान श्री जगन्नाथ जी के प्राकट्य महोत्सव के पावन पर्व देव स्नान पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनंत मंगलकामनाएं।
सनातन संस्कृति में देव स्नान पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व है। यह पावन पर्व भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दिव्य स्नान उत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन महाप्रभु का 108 पवित्र कलशों के जल से महाअभिषेक किया जाता है, जो संपूर्ण सृष्टि के कल्याण, शुद्धता, आस्था और लोकमंगल का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जीवन में पवित्रता, सेवा, त्याग, करुणा और मानवता ही सच्चे धर्म के आधार हैं।
भगवान श्री जगन्नाथ केवल एक मंदिर या एक प्रदेश के आराध्य नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के प्रतीक हैं। उनकी कृपा से प्रत्येक भक्त के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है। देव स्नान पूर्णिमा हमें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सनातन परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर भी प्रदान करती है। यह पर्व हमें प्रेम, भाईचारा, सामाजिक समरसता, सेवा और राष्ट्रहित के लिए समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
आइए, इस शुभ अवसर पर हम सभी महाप्रभु जगन्नाथ जी से प्रार्थना करें कि वे समस्त देशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, यश, वैभव और खुशहाली का संचार करें। किसानों के खेत सदैव हरे-भरे रहें, युवाओं को उज्ज्वल भविष्य प्राप्त हो, मातृशक्ति का सम्मान निरंतर बढ़े, समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना सुदृढ़ हो तथा हमारा भारत निरंतर विकास, वैभव और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ता रहे।
महाप्रभु जगन्नाथ जी की असीम कृपा हम सभी पर सदैव बनी रहे। उनके दिव्य आशीर्वाद से प्रत्येक परिवार सुखी, स्वस्थ और समृद्ध बने तथा प्रत्येक हृदय में धर्म, सेवा, करुणा और मानवता का प्रकाश सदैव प्रकाशित रहे।
जय जगन्नाथ! जय सनातन संस्कृति! जय भारत!
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