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“भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥२॥”
भावार्थ: मैं श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप माता पार्वती और भगवान शंकर की वन्दना करता हूँ, जिनके बिना सिद्ध जन भी अपने अन्तःकरण में स्थित ईश्वर का साक्षात्कार नहीं कर पाते। 🙏✨
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'श्री रामचरितमानस' के बालकाण्ड का यह पावन श्लोक हमें साक्षात् शिव-शक्ति के स्वरूप से परिचित कराता है। जीवन की हर आध्यात्मिक और व्यावहारिक सिद्धि के लिए 'श्रद्धा' (माता पार्वती) और 'विश्वास' (भगवान शिव) का होना अनिवार्य है। जब तक हृदय में ये दोनों भाव जागृत नहीं होते, तब तक भीतर बैठे परमात्मा की अनुभूति असम्भव है। 🌿
आइए, इस पावन संदेश को अपने जीवन में उतारें और श्रद्धा-विश्वास के साथ परम कल्याण की ओर अग्रसर हों। 🌸
🕉️ नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव 🙏 🚩

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