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"अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥"
🌟 भावार्थ: हे माता अन्नपूर्णा! आप सदैव अन्न, ऐश्वर्य और करुणा से परिपूर्ण रहने वाली हैं। आप भगवान शिव को उनके प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। जीवन में सत्य के बोध ('ज्ञान' और मोह से मुक्ति ('वैराग्य' की प्राप्ति के लिए, हे माता पार्वती! आप मुझे शारीरिक और आत्मिक पोषण की भिक्षा प्रदान करें। 🌿
सनातन परम्परा में माँ अन्नपूर्णा केवल अन्न की अधिष्ठात्री देवी नहीं, बल्कि जीवन में संतोष, सेवा, करूणा और आध्यात्मिक समृद्धि की भी प्रतीक हैं। उनकी कृपा से शरीर को पोषण, बुद्धि को विवेक और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। ✨
माँ अन्नपूर्णा की कृपा से हम सभी का जीवन सदैव अन्न-धन, ज्ञान और आनंद से परिपूर्ण रहे। 🌸🙏
🌾 शुभ दिन! ☀️ जय माँ अन्नपूर्णा 🙏🌾
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