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बिहार के नवादा जिले के छोटे से गांव गोरिहारी से निकले आलोक राज नारायण की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते।
आलोक ने 2015 से UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती छह प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। दो बार वे इंटरव्यू तक पहुंचे, जबकि अन्य प्रयासों में मुख्य परीक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ सके। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय सातवीं कोशिश तक अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार Civil Services Examination 2021 के परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।
उनकी इस सफलता के पीछे परिवार का बड़ा त्याग भी था। उनके पिता नरेश प्रसाद यादव, जो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, ने बेटे की पढ़ाई और UPSC की तैयारी के लिए नवादा शहर और गांव की जमीन तक बेच दी, ताकि आर्थिक परेशानी उसके सपने के रास्ते में न आए।
आलोक ने सफलता मिलने तक गांव वापस नहीं लौटने का संकल्प लिया था। इस वजह से करीब 15 साल तक वे अपने गांव से दूर रहे। सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले आलोक ने आगे BTech किया और UPSC की तैयारी के दौरान राजनीति विज्ञान में MA भी किया।
IPS बनने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर चुना और पुलिस सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कहानी बताती है कि सफलता कई बार पहली कोशिश में नहीं, बल्कि हार न मानने वाली आखिरी कोशिश में मिलती है।
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