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🐄 जर्मनी से आईं, ब्रज में बस गईं… अब गायों की सेवा ही जीवन है! 🙏

1978 में 20 साल की उम्र में जर्मनी से भारत आईं फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग का मथुरा के राधाकुंड और ब्रज की भक्ति से ऐसा जुड़ाव हुआ कि उन्होंने यहीं रहने का फैसला किया। वैष्णव दीक्षा के बाद उनका नाम सुदेवी दासी पड़ा।

एक बीमार और बेसहारा गाय को देखकर उन्होंने खुद प्राथमिक उपचार सीखा और धीरे-धीरे घायल, अंधी, बूढ़ी और लाचार गायों की सेवा को अपना जीवन बना लिया।

उन्होंने राधाकुंड में ‘सुरभि गौशाला’ शुरू की, जहां बेसहारा गोवंश का इलाज और देखभाल की जाती है। आज यहां 2,500 से अधिक गायों और नंदी की सेवा और मुफ्त इलाज किया जाता है।

🙏 जिसे लोग छोड़ देते हैं, सुदेवी दासी ने उन्हें अपना लिया। गायों की सेवा में समर्पित उनका जीवन सच में प्रेरणा देने वाला है। 🐄❤️

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