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जिस जलकुंभी को पानी की समस्या माना जाता था, उसी से अब खूबसूरत साड़ियां बनाई जा रही हैं।
झारखंड के जमशेदपुर के पर्यावरण इंजीनियर गौरव आनंद ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी 16 साल की कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी। साल 2022 में उन्होंने स्वच्छता पुकारे फाउंडेशन की शुरुआत की और जलकुंभी को उपयोगी उत्पाद में बदलने की दिशा में काम किया।
जलकुंभी पानी में तेजी से फैलने वाला पौधा है। इसकी अधिकता जलस्रोतों में सूरज की रोशनी और ऑक्सीजन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है। गौरव ने इसके तनों से फाइबर निकालकर धागा बनाने का तरीका अपनाया। फिर इस धागे को कपास के साथ मिलाकर हैंडलूम पर फ्यूजन साड़ियां तैयार की जाने लगीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक साड़ी बनाने में करीब 25 किलो जलकुंभी का इस्तेमाल होता है।
इस पहल से लगभग 450 ग्रामीण महिलाओं को जलकुंभी इकट्ठा करने और उसकी प्रोसेसिंग से जुड़ा काम मिला है। वहीं, पश्चिम बंगाल के बुनकर परिवारों को भी साड़ियां बनाने का अवसर मिला है।
गौरव की यह कोशिश दिखाती है कि पर्यावरण की चुनौती को नए विचार, मेहनत और स्थानीय लोगों की भागीदारी से आजीविका के अवसर में बदला जा सकता है।
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