9 गोलियां लगीं, एक आंख चली गई, 2 महीने कोमा में रहे… लेकिन हौसला नहीं टूटा!
CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता की कहानी सिर्फ बहादुरी की नहीं, बल्कि अदम्य साहस, देशभक्ति और जिंदगी से लड़ने के जज्बे की मिसाल है।
आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान चेतन चीता को 9 गोलियां लगीं और उन्होंने अपनी एक आंख भी गंवा दी। करीब दो महीने तक कोमा में रहने और लंबे समय तक ICU में जिंदगी की जंग लड़ने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
उनकी पत्नी उमा का विश्वास भी किसी मिसाल से कम नहीं था। जब डॉक्टरों ने उम्मीदें कम बताईं, तब भी वह अपने पति के पास मजबूती से खड़ी रहीं।
उमा बताती हैं कि जब वह चेतन का हाथ पकड़ती थीं, तो उनकी उंगलियों में हलचल महसूस होती थी। यही छोटी-सी प्रतिक्रिया उनके विश्वास को और मजबूत कर देती थी कि उनके पति एक दिन जरूर लौटेंगे।
डॉक्टरों ने भी उनके स्वस्थ होने को किसी चमत्कार से कम नहीं माना। लंबे इलाज के बाद चेतन चीता ने जिंदगी की जंग जीतकर वापसी की।
उनकी अदम्य वीरता के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
सलाम है उस वीर जवान को, जिसने गोलियों के सामने भी घुटने नहीं टेके। सलाम है उस पत्नी के अटूट विश्वास को, जिसने मुश्किल घड़ी में उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।
कुछ लोग वर्दी पहनते हैं, और कुछ लोग वर्दी का मान बढ़ाते हैं। चेतन चीता उन्हीं में से एक हैं। 🇮🇳🙏
भारत माता के इस वीर सपूत को दिल से सलाम!