3 yrs - Translate

मुख्तरीर खान येल यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिस्ट है।
भारत और पाकिस्तान की तुलना करते है तो कहते है।
एक तरफ रोशनी ही रोशनी है। दूसरी तरफ अंधेरा ही अंधेरा है।
यह बात सही है कि भारत की आर्थिक स्थिति आज बहुत अच्छी है।
लेकिन जिस तरह से हमारे पड़ोसी देशों की हालत है। हमें सीखने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान के हालात इतने खराब है कि पूरा देश बंद होने की कगार पर है। बस इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक किलो आटा की कीमत 600 रुपये है।
डिफाल्ट हो चुका श्रीलंका में 50 लाख बच्चे भुखमरी से मर रहे है।
नेपाल ग्रेलिस्ट में जा रहा है।
विश्व अर्थव्यवस्था का केंद्र चीन के हालात भी ठीक नहीं है। विकास दर 2% से नीचे है।
ऐसा अनुमान जताया जा रहा है अमेरिका, यूरोप में भी मंदी आने वाली है।
भारत ने बहुत स्मार्ट तरीके से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाया है। इसमें भारत की विदेश नीति का विशेष योगदान है।
सीखने वाली बात है यह कि हमें अपने लघु उद्दोग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
शिक्षा को निजीकरण से बचाकर सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
लोकप्रियता के लिये मुफ्त कार्यक्रमों पर फिर से विचार करना चाहिये।
पढ़े लिखे युवा वर्ग को कम ब्याज दर पर कर्ज दिया जाना चाहिये।
कर्ज के माध्यम से इतने मेडिकल कालेज खोलकर बिल्डिंग बनाना किसी रूप में समझदारी नहीं है। अधिकतर मेडिकल कालेज बिना फैकल्टी और हॉस्पिटल के चल रहे है।
व्यवस्था अपने नागरिकों पर विश्वास करे, उन्हें दरिद्र समझकर मुफ्तखोरी में न झोंककर, स्वरोजगार के लिये प्रेरित करे। यह तभी होगा जब सस्ती दरों पर ऋण प्रदान किया जाय। इनकम टैक्स में कमी किया जाय, जिससे मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़े।
विश्व की अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ जा रही है, निर्यात में कमी आयेगी। इसलिये आंतरिक खपत को बढ़ाना ही रास्ता है।
आज जो आर्थिक परिदृश्य है। वह बहुत डराने वाला है। यद्यपि हम अभी अच्छी स्थिति में है।
अपनी शक्तियों को पहचान कर , उस पर काम करने की आवश्यकता है।
लघु, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सबसे अच्छा है।
जिसे हमारे पड़ोसी मुल्कों ने बर्बाद कर दिया। कमोबेश हम भी ध्यान नहीं दे रहे है।
हमारा फोकस शहरों पर है।
चीन की बर्बादी शहरों से आ रही है। जँहा रियल स्टेट ने अर्थव्यवस्था डूबा दिया है। 60 % मकान बनकर खाली पड़े है। वह कम्पनियां डूब गई जो 3 अरब ट्रिलियन डॉलर कर्ज लेकर बनाई थी। यह धन भारतीय अर्थव्यवस्था के बराबर है।
कोरोना हो या मंदी , हमेशा गाँव ही रक्षार्थ खड़े होते है। उनके विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिये।।

image