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जस्टिन ट्रूडो की हालात किसी पाकिस्तानी पीएम की तरह हो गया है। मोदी ने दिल्ली में शपथ के पहले दिन से अपने आज तक के कार्यकाल में किसी को भी अपना दुश्मन नहीं बनाया। ट्रूडो में इतना सामर्थ भी नहीं कि मोदी का दुश्मन बन सके। मोदी का दुश्मन कोई जॉर्ज सोरोस लेवल का होना चाहिए। जस्टिन ट्रूडो तो जॉर्ज सोरोस का कृपा पात्र है। सत्ता में बने रहने के लिए जॉर्ज सोरोस से ट्रूडो की मुलाकात छिपी बात नहीं है।
भारत के राजनईक को कनाडा से बाहर निकालने का ट्रूडो का फैसला सेल्फ गोल साबित हो गया। जैसे ही कनाडा हाई कमिश्नर को आज भारत में तलब किया गया और कनाडा के राजनईक को भारत छोड़ने की हिदायत दी गई, पांच दिनों की मोहलत के साथ, तब तक ट्रूडो ने भारत के प्रति अपना बयान बदल लिया। इतनी जल्दी स्टैंड की अदला बदली करते कभी पाकिस्तान का पीएम भी मुझे नजर नहीं आया।
कनाडा का इसमें दोष भी नहीं। भारत विश्व भर में जैसी अपनी साख बनाए हुए था, ट्रूडो वही आज भी भारत से अपेक्षा कर रहे हैं। उन्हें क्या मालूम 9 वर्षों में भारत कितना बदल गया है? यदि निज्जर खालिस्तानी आतंकवादी कनाडा में पनाह पाए हुए था, तो कायदे से पुराना भारत इसकी जांच करता। कनाडा की सरकार से बात करता। तमाम डोजियर दिए जाते। और यह चलता रहता। अथवा तो कोई खालिस्तान आतंकवादी किसी विदेशी धरती पर पनाह पाए हुए हो, भारत को इससे क्या ही फर्क पड़ता?
अंग्रेजी समाचार वेबसाइट मिन्ट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह खबर पब्लिश किया गया है कि भारत से जिस कनाडाई राजनयिक को निकाला गया है, वह कनाडा की खुफिया एजेंसी के भारत में चीफ हैं। यह एक तरह से सर्जिकल जवाब है, कनाडा के इस टिप्पणी का, जिसमें भारत के राजनयिक को रॉ का एजेंट बताया गया। इसका मतलब डिप्लोमेसी के टेबल पर मामला बिल्कुल बैलेंस्ड चल रहा है। और निज्जर की हत्या को कनाडा के पीएम कनाडा की संप्रभुता पर हमला मानते हैं तो यह भारत के लिए एक नया एहसास है। कनाडा की संप्रभुता पर हमला कहने के पीछे सच्चाई है। क्योंकि खालिस्तानी आतंकी जस्टिन ट्रूडो की सरकार का एक बड़ा स्पॉन्सर है। तो निज्जर की हत्या कनाडा की संप्रभुता पर हमला ही माना जाएगा। और यह भारत का एक नया सर्जिकल स्ट्राइक ट्रेंड है।
शुभ, एक बड़ा म्यूज़िक कॉन्सर्ट भारत में होने वाला था। गायक के वेश में छिपे खालीस्तानी किसी शुभमन नाम से था। जिसने उसकी शो को स्पांसर किया था, उसने एन वक्त पर अपना डील कैंसिल कर दिया है। तो एक वह भारत था जोकि रेलवे की प्लेटफार्म पर बम से सचेत करने के लिए भारत की जनता को डराता रहता था। एक आज का भारत है जो किसी प्लेटफार्म पर बम लगाने वाला मस्तिष्क यदि कनाडा में बैठा है, तो उसको वही खत्म कर दिया जाता है‌। यह कितना नया एहसास है, नए भारत का।

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