2 jr - Vertalen

… इसलिए तो भारत सबसे अलग है…

ये वो देश है जहां कण-कण को पूजा जाता है-अगर गलती से किसी को हमारा पैर लग जाता है तो माफ़ी माँगते हैं, उसे आदरपूर्वक छू कर माथे से लगाते हैं..

यहाँ न करनी में फ़र्क़ है न कथनी में… यहाँ तो ग्रंथों में भी यही लिखा है

॥ईशा वास्यम मिदं सर्वम यत किंचियाम जगत्याम जगत॥

यानी “ईश्वर इस जग के कण-कण में विद्यमान हैं”

कपिल देव भारत की जीत को सर-आँखों पर रखते हैं, माथे पर सजाते हैं क्योंकि वो जिस माटी में पले-बढ़ें हैं,ये वहाँ के संस्कार हैं…

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