2 anos - Traduzir

यह कौन लोग हैं, जो कभी पुस्तकालय नहीं गये। जो कभी चिंतन नहीं किये।
हम चाहते तो इस पोस्ट पर टिप्पणी कर देते, लेकिन यह दिखाना आवश्यक है। हमारी #व्याख्याएं_कितनी_मूर्खतापूर्ण हैं। जिसको पचासों लोग पसंद भी करते हैं।
यदि श्रीकृष्ण बिना लड़े युद्ध में जीत दिला दिये, तो गीता उपदेश क्यों दिया था ? बिना लड़े ही जीत दिलानी थी तो उपदेश की क्या आवश्यकता थी...?????
युद्ध करने के लिये, कर्म करने के लिये ही तो उनको इतना रहस्यपूर्ण, उच्च आध्यात्मिक उपदेश देना पड़ा।
बिना कर्म के वह कुछ देंगे.... ऐसा आश्वासन तो उन्होंने कभी नहीं दिया।।
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कभी भी किसी को भी #कर्ण_जैसा_मित्र_न_मिले।
मित्र का प्रथम कर्तव्य है कि मित्र का सही मार्गदर्शन करे। निःसंकोच होकर गलत को गलत, सत्य को सत्य कहे।
ऐसा मित्र जिसके आश्वासन पर मित्र युद्घ लड़ रहा है। मित्रता से महत्वपूर्ण उसका दानी होना हो गया। कवच कुंडल दान कर देता है।
ऐसा मित्र जो भरी सभा में, मित्र को एक स्त्री को अपमानित करने के लिये उकसाता है, #क्या_ऐसा_मित्र_आप_चाहते_है ?
जिसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, उसके मित्र के कुल के विनाश का कारण बन जाये। वह मित्र नहीं है, बल्कि हजार शत्रुओं से भी बड़ा शत्रु है।।

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