2 jr - Vertalen

मैं मोहल्लों, संस्थानों, दुकानों के नाम ठीक-ठीक हिन्दी में लिखे जाने का समर्थक हूँ... असल में अंग्रेजी में लिखे जाने पर, एक सामान्य व्यक्ति द्वारा उसे हिन्दी करके पढ़ना कई बार हास्यास्पद हो जाता है.

पुणे में एक स्थान है "भोसारी", इसे अंग्रेजी में लिखने वाले कभी Bhosri लिखते हैं तो कभी Bhosari, जबकि हिन्दी पट्टी में रहने वाला व्यक्ति इसे कुछ और ही पढ़ लेता है. इसी प्रकार संलग्न चित्र में साफ़-साफ़ दिखाया है कि यह राँची की "चुटिया" ब्रांच है... लेकिन जब कहीं भी पत्र-व्यवहार में Chutia अथवा "Chutiya" लिखा जाता है तो पढ़ने वाले इसे क्या समझे?? गलती कर ही देता है...

वर्षों पहले भोपाल में न्यू मार्केट के पास एक रेस्टोरेंट हुआ करता था... "बापू की कुटिया", उसका बोर्ड अंग्रेजी में "Bapu ki Kutiya" लिखा था... शुरुआत में कुछ समय तो लोग यही आश्चर्य करते रहे कि आखिर "बापू की कुतिया" कैसी होती है?? उज्जैन में एक तहसील है जिसका नाम है "घट्टिया" (डबल T), लेकिन अक्सर अंग्रेजी में लिखने वाले इसे "Ghatia" लिख देते हैं... नाम विकृत होते-होते अंततः "घटिया" हो गया.

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