अंधेरी थी सुरंग,
कोई नहीं था संग,
लड़नी थी एक जंग,
पढ़ता रहा रंग में भंग,
कम नहीं हुई उमंग,
तोड़ा पहाड़ का घमंड,
17दिन चला युद्ध प्रचंड,
निगाहें सुरंग के अंदर पढ़ी,
मंगल को आई मंगल घड़ी,
जय श्रीराम बन गया काम,
#जय_बाबा_बौख_नाग?????
#जय_बद्रीविशाल_बाबा_केदार?????

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