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रानी लक्ष्मीबाई की मुस्लिम महिला अंगरक्षक का नाम मुँदार खातून था। वह 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मी बाई की भरोसेमंद और वफादार साथी थीं। मुँदार खातून को रानी की सेवा करने और झाँसी की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेना के खिलाफ झाँसी की रक्षा करने में उनकी बहादुरी और समर्पण के लिए जाना जाता था। एक अंगरक्षक के रूप में उनकी भूमिका और रानी के हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें भारतीय इतिहास के उस दौर में साहस और एकजुटता का प्रतीक बना दिया है।

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