2 jr - Vertalen

पिता पुत्र का प्यार लिखूंगा,
ऐसा मैं हर बार लिखूंगा,
कम पड़ जाएं गर खुशियां सारी,
फिर तो मैं संसार लिखूंगा।
पिता पुत्र का प्यार लिखूंगा।
सुबह सुबह चलने को ऑफिस,
जैसे मैं तैयार हुआ,
आकर गोदी में लिपटा वो,
खुश मैं अपरम्पार हुआ,
घड़ी की सुई देखी जब मैने,
चलने को लाचार हुआ,
खुशी छोड़कर खुशी कमाने,
खुशियों का व्यापार हुआ,
रोज रोज की यही कहानी,
पर लगता पहली बार हुआ,
पिता पुत्र का प्यार लिखूंगा,
तुम कहो तो बारंबार लिखूंगा।कुमार आलोक।

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