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गाजी फ़कीर को जानते हैं आप? नहीं जानते हैं तो जान लीजिए। ये वो व्यक्ति है जैसलमेर में जिसके पैरों पर बड़े-बड़े नेता लोटते थे। एक-दो साल नहीं, बल्कि 50 वर्षों तक वहाँ उसका सिक्का ऐसा चलता था कि कॉन्ग्रेस में उसकी बड़ी धमक हुआ करती थी। आज भाजपा के भगवा वस्त्रधारी प्रताप पुरी महाराज ने उसके साम्राज्य का अंत कर दिया है। एक ज़माना था जब उस पर हाथ डालते ही अधिकारी का ट्रांसफर हो जाता था। उसका एक ही लक्ष्य था - सीमा का इस्लामीकरण। 60 के दशक से ही वो हिस्ट्रीशीटर था, लेकिन कॉन्ग्रेस की दया से उसका कुछ नहीं बिगड़ा।
सोचिए, भारत पाकिस्तान सीमा, ऊपर से पोखरण जैसा स्थल जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना ज़्यादा संवेदनशील है। वहाँ पर गाजी फ़कीर का सिक्का चलता था। उसने अपने बेटे सालेह मुहम्मद को मंत्री बनवा दिया था। आज सालेह मुहम्मद को 35,427 वोटों से भाजपा के प्रताप पुरी ने मात दे दी है। याद कीजिए, कोरोना के दौरान जब गाजी फ़कीर मरा था तो सरे दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ गई थीं और हजारों की भीड़ जुटी थी।
आशा है कि प्रताप पुरी ऐसे तत्वों पर लगाम लगाएँगे और पाकिस्तान के इशारों पर भारत में गद्दारी कर रहे लोग जो उस इलाके में जमे पड़े हैं उन्हें उखाड़ कर फेंकेंगे। महंत प्रताप पुरी हिन्दुओं की सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और वैज्ञानिक सोच पर ध्यान देने वाले व्यक्ति हैं जिन्होंने बचपन में ही अध्यात्म अपना कर खुद को सनातन को समर्पित कर दिया था।

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