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आज से ठीक 39 साल पहले यानी 3 दिसंबर 1984 को देश में एक भीषण दुर्घटना घटी जिसे हम इतिहास में #भोपाल_गैस_त्रासदी के नाम से जानते हैं। इसमें क़रीब 15,000 आम लोगों की जान गई और कमाल की बात ये कि इस दर्दनाक घटना का जिम्मेदार किसी को नहीं ठहराया गया और न कोई जांच किसी नतीजे पर पहुंची। इसके बारे में हम जितना भी जानते हैं, शायद कम जानते हैं। इसी हृदय विदारक घटना पर एक 4 एपीसोड की सीरीज बनी हैं 'द रेलवे मैन' #therailwaymen
करीब 4 घण्टे की ये सीरीज हर भारतीय को ज़रूर देखनी चाहिए क्योंकि इसमें खौफ़नाक इतिहास की ऐसी परते खोली गई हैं जिससे देश का नागरिक शायद अभी तक अंजान है। साथ ही इसमें तत्कालीन सरकार और मानव के ऐसे स्वभाव की झलक है जो आपको अंदर तक झकझोर देगा। मतलबपरस्त इस दुनिया में चंद 'मूर्ख' लोग ऐसे भी हैं जिनसे इस स्वार्थी दुनिया में मानवता अभी भी टिकी हुई है। अपनी जान की कीमत पर कर्तव्यनिष्ठा और मानवता की हर सीमा लांघने वाले ये मूर्ख लोग ही इस घटना (सीरीज) के असली हीरो हैं। मैं मानता हूँ मेकर्स ने कई चरित्रों का मिलाकर 3-4 हीरो जैसे चरित्र लिखे हैं लेकिन फिर भी यदि ये न होते तो मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा होती। सांस लेने वाली खुली हवा में यदि जहरीली गैस घुल जाए तो क्या होगा? इसकी कल्पना से ही कंपन होने लगता है। इसको देखने के बाद दिल बहुत व्यथित है और बहुत कुछ कहना चाहता है लेकिन कहने के लिए राजनीति को लाना पड़ेगा जिसे मैं लाना नहीं चाहता।

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