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वे सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गोबिंद सिंह के अनुयायी थे। मुग़लों के दमन के लिए उन्हें भारत के पश्चिमी हिस्सों से गुरु द्वारा स्वयं पंजाब (उत्तर भारत) भेजा गया था। उन्होंने पंजाब में अपने किले से पकड़े जाने से पहले मुगलों से महत्वपूर्ण क्षेत्र जीता था और और पकड़ने के बाद मुगल उन्हें दिल्ली ले गए थे। यहां बताया गया है कि कैसे 9 जून 1716 को उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया।
पंजाब से दिल्ली स्थानांतरित करने के दौरान उनकी कमान के तहत 300 सैनिकों के सिर भाले पर रखे गए थे।
उनके बेटे (5-6 साल के बच्चे) को उनकी आंखों के सामने दो टुकड़ों में काट दिया गया और उसका मांस बंदा सिंह के मुंह में डाल दिया गया था।
और भी यातनाए दी गयी जो विभत्स थी। जिन्हें बयान कर पाना मुश्किल है।
मुगल उस समय के आम आदमी के लिए एक उदाहरण स्थापित करना चाहते थे ताकि भविष्य में किसी भी विद्रोह को रोका जा सके। लेकिन इसके बजाय, बंदा सिंह ने एक उदाहरण दिया कि आदमी की इच्छाशक्ति कितनी मज़बूत हो सकती है।

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