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गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा हुआ कहानी, "Kabuliwala" अभी फिल्माया गया है... यह एक बंगाली मूवी है, और शायद इस फिल्म का कोई डबड वर्शन नहीं है, हिंदी मैं तो बिलकुल भी नहीं... मगर अगर कोई बंगाली भाषा समझते हैं तो बिलकुल यह मूवी देखिए, यह मूवी सामाजिक भेदभाव के आधार पर है, जो की गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर खुद समाज कल्याण के लिए लिखे थें... और Mithun Chakraborty जी ने यहां प्रमुख किरदार को बहुत अच्छे से निभाए हैं... बूढ़ा होने पर भी उनके एक्टिंग स्किल्स अभी तक फीका होते नहीं नज़र आ रहा है....
"काबुलीवाला" एक अफ़गानी (काबुल~काबुली) बिक्रेता हैं, जो सड़क में खिलोने बेचते हैं, और एकदीन ऐसे खिलोने बेचते बेचते एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार के एक लड़की से उनका लगाव हो जाता है, वो उसको अपनी लड़की जैसा प्यार करते है, मगर एकदिन ये प्रेम समाज में कुछ 'सामाजिक' ( बाबू) लोगो के नज़र में आए, और फिर इस बेचारे काबुलीवाला को 'बच्चेचोर' करार दे कर बहुत पिटाई की इन तथाकथित 'सामाजिक'लोगो ने, इसी स्टोरी के आधार में बनी यह फिल्म आपको मंत्रमुग्ध कर देने के लिए काफ़ी है।

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