घर पर तो सब अच्छा लगता है। हम सुबह 5 बजे उठ जाते है। थोड़ा दौड़ते है। बाग में जाते है। 8 बजे तक जौनपुर के लिये निकल जाते है। फिर से जीवन मिला है।
जो कमी खलती है।
वह है ! सुबह सुबह राम राम राम कि वह आवाज।
वह संस्कृत के श्लोक अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहंम...। सारा वातावरण सुबह सुबह राममय हो जाता था।
उनके स्वर में ऐसा भाव था। जैसे ऋषियों का समूह गंगा स्नान को जा रहा हो।।