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1 जनवरी 1818 को #bhimakoregaon की लड़ाई में 500 महार सैनिकों ने पेशवाई सेना को छटी का दूध याद दिला दिया था।
भीमा कोरेगांव की लड़ाई हार-जीत की लड़ाई नहीं, आत्मसम्मान की लड़ाई थी जिसे हम शौर्य दिवस के रूप मे मानते है।

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