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भील योद्धाओं की सहायता से विक्रमादित्य का उज्जैन पर अधिकार
उज्जैन के राजा गर्दभिल्ल ने शकों का कड़ा विरोध किया, लेकिन वे पराजित हो गए। शकों ने उज्जैन पर अपना अधिकार जमा लिया। तत्पश्चात उनके पुत्र विक्रमादित्य जो साहसी और वीर थे। उन्होंने शकों को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया।
विक्रमादित्य ने भील सरदारों से संपर्क किया। भील योद्धा अपने साहस और वीरता के लिए जाने जाते थे। विक्रमादित्य ने भील सरदारों को एकत्रित किया और उन्हें अपने साथ मिला लिया। भील सैनिकों के साथ विक्रमादित्य ने शकों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।
भील योद्धाओं ने भीषण युद्ध लड़ा। अंततः, विक्रमादित्य और भील योद्धाओं ने मिलकर शकों को उखाड़ फेंका। शकों को भारत से खदेड़ दिया गया।
विक्रमादित्य ने उज्जैन पर अपना अधिकार जमा लिया। उन्होंने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया। विक्रमादित्य एक कुशल शासक थे। उन्होंने उज्जैन को एक समृद्ध और वैभवशाली नगर बनाया।
भील योद्धाओं ने विक्रमादित्य की बड़ी सहायता की थी। शकों को उखाड़ फेंकने में भील योद्धाओं का महत्वपूर्ण योगदान था।
संदर्भ : हजारीमल द्विवेदी ग्रंथावली
संघर्ष सपूत बालेश्वर दयाल

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