2 años - Traducciones

5 जनवरी 1544 ई० में दिल्ली का बादशाह शेरशाह सूरी 80 हजार की विशाल के सेना लेकर सुमेल आ पहुंचा। इधर सूचना मिलते ही राव मालदेव भी 50000 सेना के साथ गिरी आ पहुंचे और पीपाड़ को संचालन केन्द्र बनाया।
कई दिनों तक दोनों सेनाएं आमने-सामने की लड़ाई लड़ी , शेरशाह के सामने सेना के राशन और हाथी-घोड़ो के लिए दाना-पानी की व्यवस्था चुनौती बन गई।
ऐसी स्थिती में शेरशाह ने कूटनीतिक चाल चलते हुए कुछ थैलियों में जाली फ़रमान पत्र राव मालदेव के पास पहुंचा दिये, जो देखने मे ऐसे लग रहे थे कि यह पत्र मालदेव के सरदारों ने शेरशाह को लिखे है उसमें लिखा था कि सरदार मालदेव को बंदी बनाकर शेरशाह को सौंप देंगे
जिससे मालदेव को शंका पैदा हुई और वह अपनी आधी से अधिक सेना लेकर चले गए।
पीछे रह गए 12000 से 20000 सैनिक। जिन्होंने अपने स्वाभिमान के लिए युद्ध करने का निश्चय किया
सवेरा होते ही अदम्य साहस के साथ जैता_राठौड़ ,कूंपा_राठौड़,

image