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तुम्हे गर वो तिरपाल दिखा होता,
मेरे राम का वो हाल दिखा होता,
टपकते आंखो से पानी लबालब,
कैसे रख पाते अपने राम को टेंट में,
सालों सालों गर वो हाल दिखा होता।।
मेरे नैन तरसते हैं,
जैसे सावन में बादल बरसते हैं,
हरि कब जायेंगे अपने मकान में,
मेरे मन हर पल ये खुद से कहते हैं।
सजी अयोध्या दुल्हन जैसी,
सरयू दीप जलाए बैठी,
हम तो शबरी के जैसे रहते हैं,
हरि कब जायेंगे अपने मकान में,
मेरे मन हर पल ये खुद से कहते हैं।
मेरे राम का बना है मकान,
वो मकान बड़ा आलीशान,
आओ सब मिल मंगल गावें।
सब लगते हैं बड़े खुशहाल,
मिल पूछे अवध के हाल,
सब नर नारी बड़े बेहाल,
घर में अपने शगुन उठावें,
आओ सब मिल मंगल गावें,
निहारे खुला आसमान,
प्रभु का बना है मकान
चलो सब मिल पुष्प बरसावें,
आओ सब मिल मंगल गावें।कुमार आलोक।

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