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सनातनधर्म मे गणेश,शक्ति,शिव,विष्णु, सूर्य को उस एक आदिकारण ओंकार परमब्रह्म परमेश्वर के ही पंच दिव्य स्वरुप माना गया है.
पहले इन पंच स्वरूपों मे से एक,भगवान के चतुर्भुज विष्णु स्वरुप की ही पूजा होती थी,
पश्चात् विष्णु के ही लीलावतार स्वरूपों राम व कृष्ण की पूजा भी वैष्णवो मे प्रतिष्ठित हुई,
👇👇सावधान👇👇
कुछ अज्ञानी लोगो ने मूल विष्णु स्वरूप को गौण कर के राम और कृष्ण रूप को लेकर अलग अलग रामपंथी व कृष्णपंथी संकीर्ण धाराए बना दी है.
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विष्णु राम व कृष्ण, इन तीनो नामों व रूपों को एक मानकर एक साथ इनका गायन करे, राम व कृष्ण को विष्णु के ही रूप मानकर भजन करो.
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,हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविंदा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।।
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
वैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम।।
आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसंभाषणम् ।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावणकुम्भकर्णहननं एतद्धि रामायणम् ।🙏

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